Thursday, July 15, 2010

जीवन के मोड (Turning Points)

जीवन क्या है ?

कितना अजीब सवाल है । आज मैंने खुद से पूछ कर देखा । सच में, जवाब है भी और नहीं भी, ये तो अपना अपना नजरिया है कि उसे क्या लगता है !

कई बार जीवन में ऐसा होता है कि जो चीज़ चाहिए है उसके लिए हम लाख कोशिशे करें और यकीं भी हो कि वो मिल रही है पर अचानक एक पल में सब कुछ बदल जाता है !

वो पल वो क्षण ..... कितना अजीब महसूस होता है !

दिल की धड़कने रुक जाती है, मुंह से आवाज़ नहीं आती ।

ये मिस वर्ल्ड या मिस यूनिवर्स वाले हाव भाव तो मुश्किल से आम आदमी के चेहेरेपे आते देखे हैं मैंने; मेरे अपने चेहरे पर तो ये कभी नहीं आये । या तो कोई बहोत शांत हो जाता है या फिर रोना आ जाता है ।

पर यही तो जीवन के महत्वपूर्ण मोड़ होते है ! हाँ को ना और ना को हाँ करने वाले । ये तो उस व्यक्ति पर निर्भर होता है कि वह उस बात को कितने सकारात्मक दृष्टी से लेता है !

5 comments:

  1. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  2. We often come across such turning points , which leads us to big realizations.

    Regards,

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  3. सूना था कि मस्तिष्क में दर्द को देर तक संजोए रखने का कोई केंद्र नहीं होता। यही स्वाभाविक भी लहता था। बदलते समाज के चलन देखकर कोई भी यही कहेगा कि यही स्वाभाविक लगता है।

    बहरहाल, यह स्वाभाविक से थोड़ा बेहतर तो ज़रूर है आज भी लोग किसी पुरसुकून पल की याद में nostalgic होना भूले नहीं हैं। ब्लॉग की दुनिया में स्वागत!

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  4. यदि आपके जीवन में सबकुछ ठीक ठाक है तो, तो अच्छा सकारात्मक चिन्तन प्रस्तुत करने के लिये बधाई एवं साधुवाद, लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि यह पुरुषवादी समाज आपको दार्शनिक बनाने पर तुला हो और आपके अवचेतन मन पर कब्जा कर लिया हो। भगवान करे कि ऐसा नहीं हो। फिर भी मेरा आग्रह है कि कृपया निम्न पर प्रदर्शित आलेख-स्त्री को दार्शनिक बना देना! पढने का कष्ट करें।

    http://www.pravakta.com/?p=11515
    http://www.bharatkesari.com/
    http://presspalika.blogspot.com/2010/07/blog-post_17.html


    शुभकामनाओं सहित।
    -डॉ. पुरुषोत्तम मीणा निरंकुश
    सम्पादक-प्रेसपालिका (जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक समाचार-पत्र) एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) (जो दिल्ली से देश के सत्रह राज्यों में संचालित है।
    इस संगठन ने आज तक किसी गैर-सदस्य, सरकार या अन्य किसी से एक पैसा भी अनुदान ग्रहण नहीं किया है। इसमें वर्तमान में ४३६६ आजीवन रजिस्टर्ड कार्यकर्ता सेवारत हैं।)। फोन : ०१४१-२२२२२२५ (सायं : ७ से ८) मो. ०९८२८५-०२६६६
    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

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  5. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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टिप्पणी के लिए आपका बहुत धन्यवाद. आपके विचारों का स्वागत है ...

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