Saturday, March 9, 2013

एक तांडव


महाशिवरात्रि के पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं !

   चित्र साभार - इन्द्रनील 

एक तांडव, जिसके बाद विनाश अटल | विनाश  के बाद फिर एक नयी शुरुआत | यही प्रकृती का नियम है | शिव प्रकृति है जो हमारे जीवन की नकारात्मकता को हटाने का प्रतीक है |

शिव (श+इ+व् ) एक शक्ति है, जो सिखाता है की बिना ( जो नारी का रूप दर्शाता है ) ये विश्व शव है |

आज शिवरात्रि महज त्यौहार का रूप रह गया है | हम इसके पीछे की भावना भूल कर दूध पिलाने और पूजा करने तक सीमीत रह गए हैं |

हमारी संस्कृति में त्यौहार रोजमर्या की जिंदगी से जुड़े हैं | उसमे बहुत गहन अर्थ छुपे है जिसे जाने बिना हम त्यौहार को बस मनाते जाते है |

शिवजी के पूजा में हम बिल्व फल चढाते हैं  | पूजा के चढावे के साथ साथ अगर हम उसे ग्रहण करते है तो पाचन संबधी जो तकरारे इस मौसम मे रहती है वो काफी हद तक कम हो सकती है |

कल दूध चढ़ाया जायेगा और ना जाने कितना दूध मिटटी मे मिल जायेगा | अगर यही दूध किसी भूख से बिलखते बच्चे के पेट में जाए तो क्या उसकी तृष्णा-तृप्ती में शिव रूप का आभास नहीं होगा ?
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