Monday, June 25, 2012

फिर से जिंदगी

उसदिन अचानक
जिंदगी आई सामने,
और बोली -
“अब तक तुम भाग रही थी
समय के पीछे,
लो आज से मैं देती हूँ
तुम्हे समय,
जितना चाहे ले लो,
करो जो मन मर्ज़ी है |
बोलो तुम क्या करोगी ?
बस निकल पड़ी मैं,
जुट गई एक सूचि बनाने में,
करना जो था बहुत कुछ,
सूचि बनती गयी ...
कितना कुछ ....
पर  ना जाने क्यूँ,
एक अजीब अहसास क्यूँ आने लगा,
याद  सताने लगी
उस व्यस्तता की
कुछ खालीपन सा लगने लगा |
तब  समझी मैं
कि व्यस्तता थी,
इसलिए
हर बात की अहमियत थी |
समय  की अहमियत थी | 
शायद मैंने ही नहीं दिया था महत्व
समय को ...
फिर नए जोश के साथ ...
लौट पड़ी मैं ...
अपनी उसी व्यस्त दुनिया में 
फिर  से जिंदगी के पीछे |

चित्र  साभार : इन्द्रनील 
http://www.flickr.com/photos/61602174@N08
 




28 comments:

  1. लौटना और आगे बढ़ना और लौटना ही जिंदगी है।

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  2. फिर नए जोश के साथ ...
    लौट पड़ी मैं ...
    अपनी उसी व्यस्त दुनिया में
    फिर से जिंदगी के पीछे |
    उत्तम पंक्तियाँ....
    सादर

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  3. जिस समय जो महत्वपूर्ण है, उसे निभाना आ जाये हमें।

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  4. वाह ... बेहतरीन

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  5. यही नियति है आदमी की
    चाह सही ,पर ग़लत क़दम
    मिलते हैं हज़ार मौके उसे
    गंवाता है अधिकतर हरदम

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  6. सच कहा है ... समय की महत्त्व कों जो जितना जल्दी पहचान ले उतना ही अच्छा ....

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  7. बहुत खूब ...
    शुभकामनायें आपको !

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  8. जीवन में व्यस्तता ही सार्थक है. सुन्दर विचार.

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  9. चित्र भी, कविता भी - बढिया है!

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  10. बहुत सुन्दर रचना...
    अर्थपूर्ण..........

    अनु

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  11. बहुत अच्छी रचना है व्यस्त होना रहना एक आशीर्वाद है हम पर समय का .हाँ यदि आप अमरीका की बात कर रहीं हैं तो यहाँ कोई नीम हकीम नहीं हैं जितने भी काइरो -प्रेक्टर है सबके काम का औडिट होता है फिर तजुर्बा यहाँ भी एहम हैं हम आपको सजेस्ट करतें हैं -DR.Nicholas S.Doinidis ,24037,Meadowbrook Road , Novi ,Michigan 48 375 ,Tel 001-248-348 -7530 .Web:www.Doinidischiro.com...Email:nickdoinidis @yahoo.com.कृपया यहाँ भी देखें -
    बृहस्पतिवार, 9 अगस्त 2012
    औरतों के लिए भी है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा प्रणाली
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  12. सुंदर रचना बढ़िया अभिव्यक्ति !
    आभार ...

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  13. वाह! बेहद खूबसूरत भाव!

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  14. बढ़िया अभिव्यक्ति

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  15. वाह! बहुत सुन्दर प्रस्तुति.
    फिर से जिंदगी प्रेरक लगी.

    बहुत समय से आप मेरे ब्लॉग पर नही आईं.
    शायद भूल ही गयी होंगी.
    फिर से जिंदगी बहुत सी बातों पर ध्यान दिला रही है.

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  16. व्यस्तताओं में लौटना जीवन को सहेजने का एक तरीका है।
    अच्छी रचना।

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  17. सुन्दर प्रस्तुति .पोस्ट दिल को छू गयी.कितने खुबसूरत जज्बात .बहुत खूब,

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  18. बहुत - बहुत आभार

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टिप्पणी के लिए आपका बहुत धन्यवाद. आपके विचारों का स्वागत है ...

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